Five Days of Diwali 2026 Schedule
- Welcoming Prosperity: Devotees believe that Goddess Lakshmi visits clean, well-lit homes on Diwali night to bestow good fortune and wealth.
- Auspicious New Beginnings: Lord Ganesha is always worshipped first in Hindu rituals to eliminate hurdles and grant wisdom.
- Victory of Light: Lighting oil lamps (diyas) symbolizes driving away the shadows of evil spirits, ignorance, and negativity.
- Dhanteras: Friday, November 6, 2026
- Choti Diwali / Naraka Chaturdashi: Saturday, November 7, 2026
- Main Diwali / Lakshmi Puja: Sunday, November 8, 2026
- Govardhan Puja: Monday, November 9, 2026
- Bhai Dooj: Tuesday, November 10, 2026 (some regional calendars list it on November 11)
- Auspicious Window: Around 5:54 PM to 7:50 PM on November 8, 2026 (varies slightly by your specific city and sunset time
इस साल दिवाली का पावन पर्व वर्ष 2026 में दिवाली 8 नवंबर 2026 (रविवार) को मनाई जाएगी। इस दिन मुख्य रूप से लक्ष्मी-गणेश पूजा की जाती है। दिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है. माना जाता है कि ऐसा करने से आर्थिक समस्याओं और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है. साथ ही जीवन में तरक्की और खुशहाली आती है. आइए सरल शब्दों में जानते हैं दिवाली पर पूजा में लगने वाली जरूरी सामग्री और पूजा विधि के बारे में.
दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट (Diwali Puja Samagri List)
- माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर
- हल्दी
- भोग के लिए मिठाई
- फल और फूल
- पान
- भगवान को अर्पित करने के लिए वस्त्र
- अक्षत (चावल)
- चांदी का सिक्का
- घी
- श्रृंगार का सामान – माता और भगवान को अर्पित करने के लिए
- दीपावली की सजावट का सामान
- रंग – रंगोली बनाने के लिए
- मिट्टी के दीए
- शुभ-लाभ सामग्री
- बंधनवार
- लाइट्स – घर सजाने के लिए
दिवाली पूजा तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में दिवाली 8 नवंबर 2026 (रविवार) को मनाई जाएगी। इस दिन मुख्य रूप से लक्ष्मी-गणेश पूजा की जाती है।
- पूजा की कुल अवधि: 2 घंटे
- प्रदोष काल: शाम 06:02 बजे से रात 08:34 बजे तक
- वृषभ लग्न (स्थिर लग्न): शाम 06:27 बजे से रात 08:27 बजे तक (गृहस्थों और व्यापारिक पूजा के लिए यह समय सबसे उत्तम माना जाता है अन्य विशेष मुहूर्त (रात्रि काल)
- निशिता काल (रात्रि पूजा): रात 11:57 बजे से देर रात 12:47 बजे तक (9 नवंबर)
- सिंह लग्न (मध्यरात्रि): रात 12:54 बजे से तड़के 03:12 बजे तक (तांत्रिक साधना या विशेष परंपराओं के लिए)
पूजा विधि (Puja Vidhi)
दिवाली के दिन सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले घर की सफाई करें और स्नान करें. इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करके उसे पवित्र बनाएं.
एक चौकी लें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर चावल का आसन तैयार करें. भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर को उस पर स्थापित करें. चावल की छोटी ढेरी बनाकर घी का बड़ा दीया जलाएं. चौकी के दाईं ओर जल से भरा कलश रखें और उसमें सिक्का, सुपारी और हल्दी डालें. कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें.
इसके बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी को तिलक लगाएं और फूलों की माला अर्पित करें. इस दिन माता को खीर, बताशे, गन्ना, मिठाई और फल आदि का भोग लगाना शुभ माना जाता है. इसके बाद सबसे पहले भगवान गणेश और फिर माता लक्ष्मी की आरती करें और मंत्रों का जाप करें.
पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए माता से क्षमा याचना करें. पूजा समाप्त होने के बाद घर के सभी कोनों, दरवाजों, खिड़कियों और आंगन में दीपक जलाएं.





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